सनातनधर्मियों का रसरहस्यमय बहुदेवादिवाद (Recommended)
₹20.00
पुष्प संख्या – 15
भाषा – *हिन्दी*
कुल पृष्ठ – 48
पुस्तक आकार – 109×140mm
कवर – पेपरबैक
अनुवादक – *स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी*
संस्करण – द्वितीय (सन् 2025)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*
बिहार और नेपालके मिथिलाञ्चलकी यात्राके सन्दर्भमें बुद्धिजीवियोंकी गोष्ठीमें सीतामढ़ी, जनकपुर आदि स्थलोंमें सनातन-धर्मियोंके बहुदेववादपर आक्षेपपूर्वक प्रश्न किये गये । पूज्यचरणोंने शान्तिपूर्वक युक्तियुक्त उत्तर देकर प्रश्नकर्ता महानुभावोंको प्रमुदित किया ।
सनातनधर्मियोंके हृदयमें ही सनातनमानबिन्दुओंके प्रति अनास्था उत्पन्न कर देना, विदेशी मजहबी दुरभिसन्धिका यह ज्वलन्त उदाहरण है।
सनातनधर्मियोंके रसरहस्यपूर्ण बहुदेवादिवादपर एक निबन्ध यात्रासन्दर्भमें ही लिखनेका भाव पूज्यचरणोंके हृदयमें उदित हुआ, उसीका यह मूर्तरूप है।
पूज्यचरणोंका इस सन्दर्भमें कथन यह है कि आक्षेप या प्रश्न कर देना सुगम है; परन्तु उत्तर दे पाना और समझ पाना सुगम नहीं है । सनातनपद्धतिसे सनातनधर्मियोंका जीवन जितना सुदूर होता जा रहा है, सनातनमानबिन्दुओंके प्रति हृदयमें अनास्था उतनी ही सुदृढ़ होती जा रही है और आस्था उत्पन्न करनेकी प्रक्रिया शिथिल होती जा रही है।
सनातनधर्मोपदेशक पूज्यचरणोंके इस ग्रन्थका अनुशीलनकर इसके अभिप्रायको लोकभाषा और लोकस्तरसे प्रवचनादिके माध्यमसे विकसित करें, यही भावना आचार्यचरणोंकी है।

Reviews
Clear filtersThere are no reviews yet.