मूकाम्बिका संस्तुतिः

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पुष्प संख्या – 77
भाषा – *हिन्दी*
कुल पृष्ठ – 64
पुस्तक आकार – 120×180mm
कवर – पेपरबैक
लेखक – *स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी*
संस्करण – द्वितीय (सन् 2025)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*

दक्षिण भारतकी यात्राके सन्दर्भमें शिवावतार भगवत्पाद आदि शङ्कराचार्यने भगवती ‘मूकाम्बिका’ का दर्शन किया। उन्होंने परा चितिस्वरूपा देवीकी भक्तिसमन्वित चित्तसे संस्तुति की। उसे पण्डितप्रवर श्रीमाधवाचार्यमहाभागने ‘श्रीशङ्करदिग्विजय’ नामक ग्रन्थके बारहवें सर्गमें २७वें से ३७ वें श्लोकतक सन्निहित किया। भगवत्पादके द्वारा भगवतीकी आनन्दाश्रुपरिप्लुत नेत्र, रोमाञ्चकण्टकित शरीर, विह्वल वाणी तथा तन्मय चित्तसे निष्पन्न संस्तुति निगमागमसारसर्वस्व है। इसमें अग्नि, सूर्य तथा चन्द्रकलासे सुशोभित कलातीत सर्वेश्वरीको नाद तथा बिन्दुसे भी पर सिद्ध करनेके अनन्तर भुक्ति (भोग), भक्ति, विरक्ति तथा भगवत्प्रबोध प्रदायिनी देवीकी षट्चक्र, श्रीचक्र और मन्त्ररूपताका अद्भुत रीतिसे प्रतिपादन किया गया है।

श्रीहरिगुरुकरुणाके अमोघ प्रभावसे पूज्यपादने व्याख्याके सन्दर्भमें सरस तथा स्वल्प शब्दोंमें संस्तुतिके अन्तर्निहित भावोंको दक्षतापूर्वक व्यक्त किया है।

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