धर्मेश्वर संहिता

40.00

16 Items sold in last 3 hours
23 People watching this product now!

पुष्प संख्या – 97
भाषा – *हिन्दी*
कुल पृष्ठ – 84
पुस्तक आकार – 135×220mm
कवर – पेपरबैक
व्याख्याकार – *स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी*
संस्करण – द्वितीय (सन् 2025)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*

पूज्यपाद पुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी निश्चलानन्दसरस्वती महाभागने मनुस्मृति, महाभारत, श्रीमद्भागवत, नारदपरिव्राजकोपनिषत्, त्रिपुरातापिन्युपनिषत्, ब्रह्मबिन्दूपनिषत्, सन्न्यासोपनिषत्, शाट्यायनीयोपनिषत्, जाबालोपनिषत्, योगकुण्डल्युपनिषत्, मण्डलब्राह्मणोपनिषत्, योगशिखोपनिषत्, योगचूडामण्युपनिषत्, गर्भोपनिषत्, पैङ्गलोपनिषत्, ध्यानबिन्दूपनिषत्, प्रणवोपनिषत्, सरस्वतीरहस्योपनिषत्, बृहद्योगियाज्ञवल्क्यस्मृति और वाक्यपदीयम् आदि ग्रन्थोंका विधिवत् अनुशीलनकर इनमें सन्निहित सामान्यधर्म (मानवधर्म), विशेषधर्म (वर्णाश्रमधर्म) तथा तत्त्वसन्दर्भ सम्बन्धी नितान्त अपेक्षित अति महत्त्वपूर्ण वचनोंको सर्वहितकी भावनाके साथ ही संयुक्त परिवार और वर्णाश्रम धर्मका सर्वथा विलोप न हो, इस भावनासे विषयानुरूप यथाक्रम गुम्फितकर इस ‘धर्मेश्वरसंहिता’ की संरचना की है।
उन्होंने ग्रन्थका राष्ट्रभाषा हिन्दीमें सरल, सरस, शास्त्रसम्मत अनुवाद तथा विवरण प्रस्तुत कर सर्वहितका मार्ग प्रशस्त किया है। विकासके नामपर द्रुतगतिसे पतनकी ओर उन्मुख विश्वको सुव्यस्थित करनेकी भावनासे यह संरचना है। इसमें प्रवृत्तिको निवृत्ति तथा निवृत्तिको निर्वृति (मुक्ति) – तक पहुँचानेकी अद्भुत क्षमता है। इस ग्रन्थमें चरम वर्णके लिए विहित चरम आश्रम सत्र्यासमें अधिकृत व्यक्ति तथा उसके धर्मका संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित विवेचन है। तद्वत् विष्णुलिङ्ग ब्रह्मदण्ड और षट्चक्र तथा प्रणवदर्शनका मार्मिक निरूपण है। उपनिषदोंमें शरीर और प्रणवसे सम्बद्ध रहस्यात्मक कूटवचनोंकी व्याख्याके कारण भी यह संरचना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
इसके अनुशीलनसे दार्शनिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक धरातलपर सनातनशास्त्र तथा शास्त्रीय सिद्धान्तोंके प्रति आस्था सुनिश्चित है।

0 reviews
0
0
0
0
0

There are no reviews yet.

Be the first to review “धर्मेश्वर संहिता”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Swasti Prakashan Sansthanam

Related Products