सनातन वर्णव्यवस्था की उपयोगिता
₹20.00
पुष्प संख्या – 99
भाषा – *हिन्दी*
पृष्ठ संख्या – 44
पुस्तक आकार – 120×180mm
कवर – पेपरबैक
लेखक – *स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी*
संस्करण – द्वितीय (सन् 2025)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*
पूर्वाम्नाय – श्रीगोवर्द्धनमठ – पुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु – शङ्कराचार्य – महाभागद्वारा विरचित ‘सनातन – वर्णव्यवस्थाकी उपयोगिता’ में इस तथ्यका प्रकाश किया गया है कि सबके प्रति सहानुभूति, स्नेह तथा सबके हितमें रति – सनातनसंस्कृतिकी अद्भुत चमत्कृति है। सब देश, सब काल, सब परिस्थितिमें सबके लिए इसकी उपयोगिता इसकी अद्भुत विशेषता है।
दार्शनिक, वैज्ञानिक तथा व्यावहारिक धरातलपर इसकी उत्कृष्टता चिर परीक्षित होनेपर भी इसके प्रति अनास्था विद्वेष तथा भ्रममूलक ही सिद्ध है।
सनातनवर्णव्यवस्था शिक्षा, रक्षा, वाणिज्य और सेवाको ; तद्वत् जनसङ्ख्याको सन्तुलित रखनेकी एवम् सबकी परम्पराप्राप्त जीविकाको जन्मसे आरक्षित रखनेकी अद्भुतविधा है। अतः यह प्रतिभा और प्रगतिकी आधारशिला है।

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