रथारूढ़ श्रीजगन्नाथादिके दर्शन तथा स्पर्शादिकी अधिकार
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पुष्प संख्या – 107
भाषा – *हिन्दी*
पृष्ठ शखता – 64
पुस्तक आकार – 135×220mm
कवर – पेपरबैक
लेखक – *स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी*
संस्करण – प्रथम (सन् 2014)
प्रकाशक – *स्वस्ति प्रकाशन संस्थान*
विदित हो कि २३.०८.२०१३ को प्रेषित ‘रथारूढ़ होकर रथस्थ श्रीजगन्नाथादिके दर्शनमें कौन कौन अधिकृत हैं, कौन- कौन अनधिकृत ?’ विषयक पत्रका उत्तर पूज्यपाद गोवर्द्धनमठ- पुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु – शङ्कराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती महाभागके शब्दोंमें संलग्न है। पत्रोत्तरका यथावत् अध्ययन और अनुशीलनकर प्राप्त निष्कर्ष क्रियान्वित हो, ऐसी भावना है ।
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